मछली की कहानी : विनोद कुमार शुक्ल वस्तुनिष्ठ प्रश्नऔर सारांश || Machhali ki kahani Vinod Kumar Shukla

Machhali Ki Kahani Objective question 

मछली की कहानी : विनोद कुमार शुक्ल || Machhali ki kahani Vinod Kumar Shukla 


मछली की कहानी वस्तुनिष्ठ प्रश्न 

Machhali Ki Kahani Objective question 

 

1. मछली की कहानी के लेखक कौन है ? 

उत्तर : मछली की कहानी के लेखक विनोद कुमार शुक्ल है

2. विनोद कुमार शुक्ल का जन्म कब हुआ था ? 

उत्तर : विनोद कुमार शुक्ल का जन्म 1 जनवरी 1937 ई ० को हुआ था | 

3. विनोद कुमार शुक्ल का जन्म कहाँ हुआ था ? 

उत्तर : विनोद कुमार शुक्ल का जन्म राजनांदगांव , छत्तीसगढ़ में हुआ था |


 मछली की कहानी सारांश विनोद कुमार शुक्ल 

Machhali ki kahani Saransh Vinod Kumar Shukla 

हम लोगों ने दौड़ते दौड़ते एक पतली गली में घुस गए थे/और जिस गली  से भर बहुत नजदीक पड़ता था| लेकिन कुछ भी न पड़ने के कारण बिखराव आ गई थी| और वह दौड़ इसलिए रहे थे कि मछलियां बिना पानी मे रखा हुआ है तो वह मर जाएगा और उनके झूला में कुल्ले तीन मछलियां थी और एक मच्छर या तो उसी वक्त मर गई थी जब मछली को पिताजी खरीद कर लाए थे / जब वह देखा कि मछलियां झूला में तड़प उछल रही थी तो उसे महसूस हो रहा था /और वह बच्चा मन ही मन में सोच रहा था कि पिताजी मछली जरूर मांग लेगी फिर उसने सोचा कि मछली को कुएं में डाल कर बहुत बड़ा कर लेंगे मन होगा तो हम उसे पार्टी से निकाल कर खेलेंगे भी और बाद में भी हम उस मछली को फिर से कुएं में डाल देंगे जिससे वह जीवित रह सके /  पानी भी जोर से गिरने लगा था और पानी में खड़े होकर मुंह का जो ले आकाश से फेल कर मैंने देखा आकाश का पानी मछलियों के झूले पर पढ़ रही थी/  और संतु मछली को बचाने के लिए एक मकान के नीचे खड़ा था /  और वह दोनों भाई बहन बुरी तरह से भी गए थे और कोई मछली पानी से छिपाकर आसपास किसी अलावे नदी का अंदाजा जोशीली और  छूटते उसके हाथ से झूला  बचा/  और उसने भाई हुई पार्टी से झूलों की मछली और भरी बाल्टी मछली नीचे आ जाती थी तब एक बार एक छोटी सी मछली मेरे हाथ से पीकर नहाने घर की ओर गई थी /  संतु मैंने  टटोला खोला था/ और वह बच्चा जब किसी को नहीं देखता है तो उसके घर के पीछे जाकर खड़ा हो जाता है जहां से एक नाले मिलती है और गंदी मछलियां वहां पर रहती है और उसकी  हाथों से मछलियां छूट गई तो उसने घर के पीछे खड़े होकर गंदी नालियों को देख रहा था कि इसे मछली आएगा लेकिन मछलियां से तीन मुहानी 3 मीटर दूरी तक चली गई थी /  और संतु ठंड से काफी कहा था और उसको भीगा हुआ देखकर माने मार पड़ेगी और तूने कविता कर मुझको उतारकर दोनों से जोड़ा दोनों हाथों से पेट की अंगूठियां छोड़ा फिर केवल पहेली दवाई घर बैठ|मैंने संतु से कहा कि अगर जो पिताजी सबसे ऊपर वाली मछली मांगे तो संतुलित सर हिलाकर कहा कि अच्छा बड़े प्यार से देख रहा था और वह मछलियां को देखना भी चाहता था लेकिन वह डरा रहा था  /  मैंने एक मछली उठाकर कहा कि मेरे हाथों यह मछलियां की चल पड़ी थी फिर मैंने पार्टी में उसे डाल दिया था और बाल्टी से पानी के छींटे से लोगों पर पड़े बस क्या सन तूने चौक कर थोड़ा पीछे हट गया तो मछली की आंखों में दबी हुई अपनी छाया देखना चाहता था देविका की थी की मछलियां जब मर जाती है तो मछली की आंखों से झांकने की अपनी परछाई नहीं दिखता है तो मैंने हाथ डालकर मुर्दा की हर एक उस मछली को बाहर निकाला /  के कुछ देने वाला और उसकी मूछों को पकड़कर मैंने दो तीन बार हिलाया तो मछली मैं कोई भी हरकत नहीं थी और जब इकबाल को लंबी मूछ के उच्च ले गई तो संतु की उसकी आंख से झाग तेरी परछाई इतनी इसमें दिखती है क्या | और संतु वाह रे वाला फच फच फच इसलिए बैठा था कि मेरे पास कहने का कोई मछली की आंख का उत्सव झांकने लगा था / और इसने यह कहता है कि तुझ से कुछ नहीं होने वाला है और वह यह दोनों हाथों से वह मछलियां को उठा लिया और वह अपने चेहरे के बिल्कुल पास लाकर उसने देखा कि उसकी आंखों में खुजली परछाई दिखी रही थी /  और उसे समझ में नहीं आ रहा था कि मछली की परछाई है मेरी परछाई कर्म ऐसा हो गया है क्या /उसने सोचा कि शायद इसकी जान बच रही है क्या जाकर वह चुपचाप दीदी को बुलाया और संतोष से कहा कि मैंने बाल्टी में फिर से मछली को डाल दी और मैं जब थोड़ी देर बाद लौट कर आया तू कहा कि दीदी तो सो रही थी / और वह दिन भर सो रही है मुझे आश्चर्य हुआ मां कहां है |Machhali ki kahani Vinod Kumar Shukla 


 मां उसकी उस तरफ मसाला पीस रही थी

और मेरा दिल बैठ गया था मछली के लिए मसाला च र्होगा 

और उसने बहुत दुख से कहा कि मछलियां आज ही बनेगी क्या ? 

 

 अभी मछलियां कट जाएगी और संतों ने भोलेपन से पूछा उसने कहा कि हां

 और सन तूने इतना उदास हो गया कि और मछली को काटने के लिए उसके घर में एक अलग से पाटा था जिस पर मछलियां को ऊपर रखकर उसे काटा जाता था / और उस पाटा पर विरोध में छलिया काटी जाती थी जिससे पाटा तिरछी की निशानियां हट गई थी और वह फाटा था जो पत्नी ड्रम के पीछे रखा रहता था /  जिस पर मछलियां रोज बना करता था और उसके घर के नौकर मछली को काटा था और उसने आंगन से बाहर आकर देखा की जगह मछलियां काटी जा रही थी वहां पर झूला फाटा रखा हुआ था जिससे कि चूल्हे में राखी  | और हिमांशु को यह मालूम था कि मछलियां जो कि लहान घर में रखा है और वह आते ही अंगूठा में से मथानिया को निकाल कर उसने कुएं में पालने का उत्साह बुझ गया था /  और उनकी और जब दीदी ने करवट ले लेती जा रही थी तब कमरे में वह जाकर देखा /  और मैंने इशारे से बुलाया कि वह भी गीले कपड़े बदलने और शायद आहट हुई हमें देखा नाराज हो गए / उसको बहुत प्यार से समझा कि दीदी   खूब अच्छे-अच्छे कपड़े उन्हें पहनाए / जब उसकी गिरी ने संतु को बाल झाड़ रहे थे तो संतु ने बड़े-बड़े आंखों से दीदी को टकटकी बांधे हुए हैं वह देख रहा था और सभी लोग कहते हैं कि दीदी बहुत सुंदर है /  और मैंने दीदी से कहा कि दीदी पिताजी आज मथानिया आई नहीं तीन है शायद मर गई है क्या अभी फटेगी और दीदी चुपचाप रह गई फिर वह कमरे का दरवाजा बाहर से बंद कर दिया था /  और वह कमरे में अकेले तबीयत ठीक नहीं है संतु कमरे के बाहर निकल आए और बंद कमरा रहा था जब मैं दरवाजा से नीति दीदी | Machhali ki kahani Vinod Kumar Shukla


 

Machhali ki kahani Vinod Kumar Shukla 

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