संपूर्ण क्रांति जयप्रकाश नारायण जीवन परिचय || Jayaprakash Narayan important objective

(  संपूर्ण क्रांति  )    जयप्रकाश नारायण जीवन परिचय 

संपूर्ण क्रांति जयप्रकाश नारायण जीवन परिचय ,जीवन परिचय संपूर्ण क्रांति जयप्रकाश नारायण


  पा    – 3   ( संपूर्ण क्रांति )    जयप्रकाश नारायण जीवन परिचय  

                             संपूर्ण क्रांति (  जयप्रकाश नारायण ) 

Jayaprakash Narayan important objective

जन्म  :  11 अक्टूबर 1902 ईसवी को  |

  निधन ( मृत्यु )    :   8 अक्टूबर 1979  स्त्री ईसवी को |  जन्म स्थान    :  सिताब दियारा गांव उत्तर प्रदेश के बलिया और बिहार के सारण जिले में फैला हुआ था | उनका पुकारू  नाम :   बचपन में बाउल नाम था |  बड़े होने पर जे पी नाम से प्रसिद्ध अपनी   जनपक्षधरता  के लिए लोक नायक के रूप में प्रसिद्ध हुए थे | 

 माता पिता का नाम उनकामाता का नाम फुल रानी एवं पिता का नाम  हरसू दयाल थे  | 

 पत्नी का नाम  :  प्रभावती देवी (  प्रसिद्ध गांधीवादी ब्रजकिशोर प्रसाद की पुत्री थी | ) 

  शिक्षा उनका     :  उनका प्रारंभिक शिक्षा  घर पर ही फिर पटना कॉलेज पटना में खेल के लिए सर्वोच्च पुरस्कार प्राप्त किए हैं |  पटना कॉलेज पटना में प्रवेश की थी | असहयोग आंदोलन के दौरान शिक्षा अधूरी छोड़नी पड़ी थी | 1922 ईस्वी में  | शिक्षा प्राप्ति के लिए अमेरिका गए थे |  वहां कैलिफोर्निया  बर्कले बीसीक्शन मेडिसन आदि कई ऐसे विद्यालयों में अध्ययन किए थे |  मार्क्सवाद और समाजवाद की शिक्षा ग्रहण की थी |  मां की आवश्यकताएं के कारण पीएचडी न कर सके और देश लौट कर वापस चले आए |


 राजनीतिक जीवन में  :  1929  ईसवी में कांग्रेस में शामिल हुए थे | 1 932ईस्वी में सविनय अवज्ञा आंदोलन के दौरान जेल भी गए थे |  फिर जेल से बाहर निकलकर कांग्रेस के अंदर ही कांग्रेस सोशलिस्ट पार्टी के गठन में अहम भूमिका निभाई थी | 1939,1943  ईस्वी में भी जेल गए थे | 1942 के आंदोलन से विशेष प्रसिद्धि मिली थी |  आजादी के बाद 1952  ईस्वी में  प्रजा सोशलिस्ट पार्टी के गठन में योगदान निभाए थे |  धीरे-धीरे सक्रिय राजनीति से स्वयं को अलग कर लिए लिया था राजनीतिक से स्वयं को अलग कर लिया था | 1954  ईस्वी में  विनोबा भावे के सर्वोदय आंदोलन में जुड़े थे | 1974 ईस्वी में  छात्र आंदोलन का नेतृत्व किया और आपका काल के दौरान जेल भी गए थे |  इनके मार्गदर्शन में ही जनता पार्टी का गठन हुआ था |


कृतियां    :  रिकंस्ट्रक्शन ऑफ इंडिया पॉलिसी के | कुछ कविताएं भी लिखी थी |  डायरी एवं निबंध भी प्रकाशित किए थे |  

सम्मान   :  1965 ईस्वी में  समाज सेवा के लिए मैगसेसे  सम्मान मिली थी | 1998ईस्वी में भारत रत्न सम्मान मिली थी | 

 जयप्रकाश नारायण   शताब्दी में भारत की एक प्रमुख समाजवादी विचारक क्रांतिकारी नेता समर्पित समाज कर्मी तथा विद्रोही  स्वाधीनताका सेनानी थे |  

संपूर्ण क्रांति बिहार प्रदेश ‘ छात्र संघर्ष समिति ‘ के मेरे युवक साथियों , बिहार प्रदेश के असंख्य नागरिक भाइयों और बहनों |


  जयप्रकाश नारायण सारांश 

अभी-अभी रेनू जी ने जो कविता पढ़ी अनुरोध तो वास्तव में उनका का सुनाना तो वह चाहते थे : मुझसे पूछा गया कि वह कविता सुना दे या नहीं मैंने स्वीकार किया लेकिन उसने बहुत सारी रतियां और अभी हाल की बहुत दुखद समृद्धि को जागृत कर दिया है इससे हृदय भर उठा है आपको शायद मालूम ना होगा कि जब मैं वेल्लोर अस्पताल के लिए रवाना हुआ था तू जाते समय मद्रास में 2 दिन अपने मित्र श्री ईश्वर के साथ रुका था वहां दिनकर जी गंगा बाबू मिलने आए थे बल्कि गंगा मां हूं तो साथ ही रहते थे और दिनकर भी बड़े प्रसन्न दिखे उन्होंने अभी हाल की अपनी कविताएं सुनाएं और मुझसे कहा कि आपने जो आंदोलन शुरू किया है जितनी मेरी आशा है आप से लगी थी उन सब की पूर्ति आपके इस आंदोलन में इस नए वाहन में देश के करोड़ों का आपने जो किया है मैं देखता हूं तालियां तालियां बजाई मेरी बात चुपचाप सुनिए अब मेरे मुंह से आप पुकार नहीं सुनेंगे लेख जो कुछ विचार मैं आपसे करूंगा वह विचार हूं कारों से भरे होंगे क्रांतिकारी विचार होंगे जिन पर अमल करना आसान नहीं होगा अमल करने के लिए बलिदान करना होगा आपका आना होगा और लाठियों का सामना करना होगा जेलों को भरना होगा जमीनों की मूर्तियां होगी यह सब होगा | यह क्रांति है मित्रों और संपूर्ण क्रांति है या कोई विधानसभा के विघटन का ही आंदोलन नहीं है वह तो एक मंजिल है जो रास्ते में है दूर जाना है दूर जाना है जवाहरलाल नेहरू के शब्दों में अभी न जाने कितने मिलो इस देश की जनता को जाना है उस सब राज को प्राप्त करने के लिए जिसके लिए देश के हजारों लाखों जवानों ने कुर्बानियां दी है जिसके लिए सरदार भगत सिंह उनके साथी बंगाल के सारे क्रांतिकारी साथी महाराष्ट्र के साथ ही देश भर के क्रांतिकारी चली गोली का निशाना बने या तो फांसी पर लटकाए जिस स्वराज के लिए आंखों लाल देश की जनता वार वार जिलों को भर्ती रही है लेकिन आज 27 28 वर्ष के बाद जो सवराज है उसमें जनता करा रही है भूख है महंगाई है भ्रष्टाचार है कोई काम नहीं जनता का निकलता है वह रिश्वत दिए सरकारी दफ्तरों में बैंकों में हर जगह टिकट लेना है उसमें जहां भी हो रिश्वत के बगैर काम नहीं जनता का होता है हर प्रकार के अन्याय के नीचे दब रही है शिक्षा संस्थाएं भ्रष्ट हो रही है हजारों नौजवानों का भविष्य अंधेरे में पड़ा हुआ है जीवन उनका दी जाती है गुलामी की शिक्षा बेरोजगारी बढ़ती जाती है गरीब की बढ़ती जाती है गरीब हटाओ के नारे लगते हैं लेकिन गरीबी बढ़ी है मित्रों आज स्थिति यह है और इस स्थिति में वह दिनकर जी ने अपने शब्द सुनाएं थे और उसी रात को हमारे मित्र रामनाथ जी इंडियन एक्सप्रेस के घर पर मेहमान थी रात को दिल का दौरा पड़ा 3 मिनट में सारा इंतजाम था |

वहां पर पटना का अस्पताल तो पता नहीं 3 घंटे में भी तैयार ना हो पाता सभी डॉक्टर सब तरह के औजार लेकर तैयार थे लेकिन दिनकर जी का हाथ फिर से जिंदा नहीं हो पाया उसी रात उनका निधन हो गया ऐसी चोट लगी उनकी यह कविता सुनकर उनका वह सुंदर सॉन्ग में जोशीला चेहरा याद आ गया आज लगता है हमारे दो मित्रों को कितनी करनी है आज माई बेनीपुरी जी होते उनकी लेखनी में जो ताकत थी आज के जुलूस का आज की इस सभा का जो वर्णन है वह देते एक एक शब्द में अंगार होती मित्रों एक स्मृतियां जगी है और इनका मैं तो थक गया हूं लेकिन आज भारी जिम्मेदारी है और मैंने अपनी तरफ से मांग करें लिया है तरुण छात्रों से बराबर कहता रहा हूं जब पहला हमने आवाहन किया था युद्ध डेमोक्रेसी का लोकतंत्र में युवकों का क्या रोल है या हमने तो बताया था उसमें लिखा था और उसके बाद बराबर कहता रहा हूं संचालन समिति में बहस करता रहा हूं हम बुड्ढे हो गए हमारी सलाह ले लीजिए हम दूसरी पीढ़ी के हो गए इस फैसले को इन को मानना होगा और आप को मानना होगा तो इस नेतृत्व का कोई मतलब है तब यह क्रांति सफल हो सकती है और नहीं तो आपस के झगड़ों में पता नहीं कि हम किधर बिखर जाएंगे और क्या नतीजा निकलेगा  मित्रों एक बात तो यह कहानी थी मैं जानता हूं कि डॉक्टर रहमान यहां बैठे होंगे  वह कुछ चिंता में पढ़े होंगे कि इस जोर से बोलने का असर मेरे हृदय पर बुरा होगा मैं भी समझता हूं जरा अपने को बांध के बोलूंगा  कुछ ऐसे मित्र हैं जिनके भाव अच्छे हैं हमारे पुराने मित्र जो सोशलिस्ट पार्टी में थे या जो नहीं भी थे चाहते हैं कि जयप्रकाश नारायण और इंदिरा जी ने कुछ मेल मिलाप हो तो मित्रों मेरा किसी व्यक्ति से झगड़ा नहीं है किसी व्यक्ति से झगड़ा नहीं है चाहे हुए इंदिरा जी हो या कोई हो हमें तो नीतियों से झगड़ा है सिद्धांतों से झगड़ा है कार्यों से झगड़ा है जो कार्य गलत होंगे जो नीति गलत होगी जो सिद्धांत प्रिंसिपल्स गलत होंगे जो पॉलिसी गलत होगी चाहे वह कोई भी करें मैं विरोध करूंगा अपनी अकल के मुताबिक हम लोग इनकी तरह नौजवान के जमाने के लिए जरूरत होती थी हम लोग की बापू के सामने हम कहते थे कि हम नहीं मानते हैं बापू यह बात और बापू में इतनी माता थी इतनी महानता थी कि बुरा नहीं मानते थे फिर भी बुला कर हमें प्रेम से समझाना चाहते थे समझाते थे तो उनकी भी आलोचना की है मैंने उस जमाने में तुम्हें और मार्क्सवादी था बाद में लोकतांत्रिक समाजवादी बना किंतु बापू की मृत्यु के बाद कई वर्षों के बाद 1954 में सर्वोदय में आया बिहार में जवाहरलाल थे एक बड़े भाई थे मैं उनको भाई कहता ही था उनका बड़ा हमारे ऊपर पता नहीं क्यों मुझे वह मारते थे मैं उनका बड़ा आदर और प्रेम करता था लेकिन उनकी आलोचना करता था उनमें भी बंद था अक्सर तो उन्होंने हमारे अपनों का बुरा नहीं माना लेकिन पटना फायरिंग पर जो मैंने ध्यान दिया था मैं मानता हूं कि बहुत सख्त भाषा का प्रयोग किया था उस पर बहुत नाराज हुए लाल बहादुर जी ने कश्मीर के मामले में कुछ किया उन्होंने मैं उनकी भी आलोचना की तार भी दिया कि यह बहुत गलत काम आपने किया है इससे कश्मीर के सवाल को हल करने में आपको दिक्कत होगी थोड़े ही दिनों में 18 महीनों में वह चल बसे देश का दुर्भाग्य है | अपना देश पिछड़ा हुआ है  | इसलिए बाप इसके कि हमने लोकतंत्र की स्थापना की है विकसित देशों के लोकतांत्रिक समाज में तो प्रति प्रभावित शक्तियां यानी परस्पर एक दूसरे को प्रभावित करने वाली शक्तियां होती है जनमत का जो प्रबल  प्रभाव प्रतिनिधियों पर निरंतर पड़ता है जो स्वतंत्र और शासित प्रेस पत्र पत्रिकाओं के रोल होते हैं शिक्षित समुदाय का जो वैचारिक और नैतिक असर होता है इस सारे इंफ्रास्ट्रक्चर का यानी जनता और शासन के बीच की संरचना का यह नितांत अभाव है ऐसी स्थिति में हमारा लोकतंत्र केवल नाम मात्र का रह जाता है इस पूरी आंतरिक संरचना का इंफ्रास्ट्रक्चर का निर्माण तो 1 दिन में नहीं हो सकता परंतु उसके अभाव में आम जनता या मतदान मतदान के सिवा कोई भी और जनता का किसी प्रकार का उन पर नहीं रहता सिवा इस है | कि अगले चुनाव में जनता यदि चाहे तो उसको वोट नहीं दे परंतु यह भी रुपया, जाति, बल प्रयोग  विद्याचरण आदि के कारण हो जाता है अब चुकी प्रदेश के छात्र युवा और सर्व साधारण जनता जागृत हो गई है वह आगे बढ़ रही है और कुछ नया चाहती है वर्तमान स्थिति में परिवर्तन चाहती है अतः इस परिस्थिति का लाभ उठा करना चाहूंगा | कि आज जो असंगठित जानता है उसमें ऐसी शक्ति आ जाए कि वह सही आदमी का चुनाव कर सके तथा चुनाव के बाद अपने प्रतिनिधियों के आचरण पर यथासंभव खुश रख सके | 

जयप्रकाश नारायण 11 अक्टूबर ,1902 8 अक्टूबर 1979 संक्षेप में जेपी भारतीय स्वतंत्रता सेनानी और राजनेता थे उन्हें 1970 में इंदिरा गांधी के विरुद्ध विपक्ष का नेतृत्व करने के लिए जाना जाता है इंदिरा गांधी को पदच्युत करने के लिए उन्होंने संपूर्ण क्रांति नमक आंदोलन चलाया था |


 

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